शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

                             
                                   पिंजरा

सुन्दर सी  चिड़ियाँ जिसके पंखो में ,
दुनियाँ नापने की शक्ती हैं।
खुले आसमान मे उड़ना तो उसका हक्क हैं,
फिर क्यों अपने पंख फड़फड़ाने पर भी उसे पाबंदी हैं।।

नैन मटकतें उस स्वर्ण के पिंजरे में,
खुशिया भी उस्से आंख मिचौली जो खेलती हैं।
'खुदा' की उम्मीद तो आज भी उसे है,
इसलिये तो खोज तलाश आज भी जारी है।।

हिम्मत नही हारती है, अपनी चोंच से 
हर दिन उस पिंजरे को काटती हैं।
उमीदों का भंडार है वो,जिसके सिर पर 
'शिवजी' का आशीर्वाद ,
तो शरीर मे काली माँ की शक्ती हैं।।

समाज के लोग तो समाज की प्रथाए,
हर कोई उसे अपने जाल मे फंसाना चहता हैं।
पर भूल गए सब की वह एक चिड़िया है,ऐसी चिड़िया
 जिसे पाना तो दूर, उसकी उंचाई ही देखकर हर 
निर्दयी अपनी जान भी गवाता हैं।।

लोगो ने बहुत कोशिश की, उसे जकडे रखने की,
और उसके पंखो को काटने की।
पर उन  बेड़ियो में उत्नी ताकत ही नही थी,
उसके हौसले के आग की गर्माहट को झेलने की।।

वोह लोहा अब पिघल गया,
वोह पिंजरा अब टूट गया,
उस खूबसूरत चिड़िया को आसमान में उड़ता हुआ देखकर,
छोटी सी चीटियां ही नही ,बल्कि 
बड़े बड़े हाथियों का झुंड भी, खुशी से जगमगा गया।।


 ABOUT THE POEM:This poem is dedicated to all those girls who are not able to live their life how they  want.

शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

                                  हौंसला
 

क्या हुआ? डरा दिया क्या ज़िंदगी ने।
हर पल हँसने वालें इस चेहरे को 
क्या रूला दिया ज़िंदगी ने।।

आज हालात मुश्किलों से भरे है।
                 तो यह भी मत भूलना की उन्से 
लड़ने के लिये हम भी एक मज़बूत दिवार
 की तरह खड़े है।।

ये हौंसला तो कभी टूटेगा नही।
चाहे कितना भी ज़ोर लगाले येह ज़ालिम दुनियाँ ,
पर वोह खुदा ,वोह खुदा 
कभी भी हमसे रूठेगा नही।।

मेरे दिल ने मुझसे कहा, "तू डर मत, हर मोड़ पर इम्तिहान तो जीवन का एक हिस्सा है, तेरे हौसले को और भी बुलंद बनाने के लिए।
डर डर कर जीना ये तो तेरा स्वभाव नही! फिर क्यों खुद को खो रहा है तू इस नकली दुनियाँ मे नकली दोस्त बनाने के लिए?

दुनियाँ की ताकत तो हम नही जानते, पर 
हमारी तो बात ही कुछ और हैं। 
शक मत करना हमारी अच्छाई पर वरना जल जाओगे,
क्योंकि हम वो आग है जो शोला तो बनता ही हैं,
पर वो मशाल भी जो जलता है, तो सिर्फ अंधेरे में 
रोशनी लाने के लिए।


ABOUT THE POEM:- Most of the time we feel helpless and worthless.And it so happens that we often give up on to handling those difficult life situations. This poem is inspired by my dad who handled all his life situations from the time he was just 13 years old and through his struggles he made his life how he wished to be. So never give up. Success is just one step ahead of you but run a bit faster you will surely be able to grab it.